गोमती रिवर फ्रंट के विकास के बारे मे

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, श्री अखिलेश यादव ने माननीय सिंचाई मंत्री को गोमती नदी के विकास में आने वाली जरूरतों से अवगत कराया, जो काफी तेजी से एक नाले में तब्दील होती जा रही थी और यह इच्छा जताई की गोमती के तटों पर हरियाली का नज़ारा होना चाहिए।
  • पूर्व सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री एवं प्रमुख सचिव, सिंचाई श्री दीपक सिंघल ने जापान का दौरा किया और इस टोक्यो और ओसाका जैसे शहरों में बने रिवर फ्रंट का गहनता पूर्वक अध्ययन किया और साथ ही विभिन्न देशों के रिवरफ्रंट के बारे में भी अध्ययन किया, जिससे उन्हें रिवरफ्रंट के निर्माण में थोड़ी आसानी हो सके। इसके बाद उन्होंने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को गोमती नदी (लाईफलाईन ऑफ लखनऊ) के तट पर एक विश्व स्तरीय रिवरफ्रंट बनाने के निर्देश दिएं। गोमती नदी के विकासशील कार्यों का जिम्मा सिचांई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश को सौंपा गया है।
  • पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ऐतिहासिक पहल, संस्था के दृढ़ निश्चय और माननीय सिंचाई मंत्री के सार्थक दिशा-निर्देश के आधीन गोमती नदी का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सौंदर्यीकरण करने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने जिम्मेदारी उठाई है।



  • माननीय मुख्यमंत्री और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री के सपने को साकार करने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश ने एक महीने के सीमित समय में योजना तैयार करी और सराकर द्वारा स्वीकृत कराया
  • गोमती नदी में दूषित पानी को रोकने के लिए शारदा नहर प्रणाली को महदोइया और अटरिया एस्केप को पुनः बनाकर उसे गोमती नदी से जोड़ दिया जाएगा।
  • देश में पहली बार बहती हुई नदी पर अस्थायी बांध का निर्माण कराया गया, नदी के सामान्य बहाव को एक नाले से होते हुए मोड़ा गया, बैराज के द्वार खुले हुए थे और नदी को सफलता पूर्वक आधुनिक तकनीक मशीन से साफ कराया गाया।
  • नदी के बीच एक बांध को ब्रिटिश काल के दौरान बनाया गया था जो नदी में दिखाई देता है और आज की पीढ़ी उसे पहली बार देखेगी।
  • इस परियोजना के तहत, निम्न कार्य प्रस्तावित है:-
    • हार्डिंग पुल से गोमती बांध तक नदी की डिसिल्टिंग।
    • डायाफ्राम दीवार के निर्माण द्वारा हार्डिंग पुल से गोमती बांध तक गोमती नदी को चैनलाईज करना।
    • गोमती नदी के दोनो ओर ग्रीन बेल्ट के विकास एवं सौंदर्यीकरण का कार्य।
    • बैराज, पुल और नदी को दोनों तटों सहित सभी ढांचों पर उचित रोशनी का कार्य करना।
  • मेढ़ के नीचे से गोमती बांध के ऊपर तक जल निकाय को बनाने के लक्ष्य है।