श्री योगी आदित्यनाथ

श्री योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश सरकार

श्री धर्म पाल सिंह

श्री धर्म पाल सिंह

माननीय कैबिनेट मंत्री
सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)

  • मा0 सिंचाई मंत्री श्री धर्मपाल सिंह द्वारा, मा0 मुख्य मंत्री जी द्वारा दिनांक १३ जून २०१९ को सिंचाई विभाग की समीक्षा में दिये गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने हेतु सिंचाई विभाग मुख्यालय पर वरिष
  • मा0 सिंचाई मंत्री श्री धर्मपाल सिंह द्वारा, मा0 मुख्य मंत्री जी द्वारा दिनांक १३ जून २०१९ को सिंचाई विभाग की समीक्षा में दिये गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने हेतु सिंचाई विभाग मुख्यालय पर वरिष
  • माननीय मुख्यमंत्री श्री याेगी आदित्यनाथ जी लोकभवन, लखनऊ में दिनांक १३ जून २०१९ को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की समीक्षा की समीक्षा करते हुऐ।
  • उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दिनांक लखनऊ में दिनांक  30 मई 2019 को बाढ़ पूर्व तैयारी की समीक्षा बैठक की गई।
  • उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दिनांक लखनऊ में दिनांक  30 मई 2019 को बाढ़ पूर्व तैयारी की समीक्षा बैठक की गई।
  • माo सिंचाई मंत्री श्री धर्मपाल सिंह जी द्वारा प्रमुख अभियंता कार्यालय में दिनांक २९.०५.२०१९ को विभागीय समीक्षा की गई।
  • श्री ध्यान सिंह प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष द्वारा श्री वी0 क0 निरंजन मुख्य अभियंता एवं श्री सिद्धार्थ कुमार सिंह अधीक्षण अभियंता को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए
  • राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी, 2019 को इं0 वी के राठी, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, इं पी पी पांडेय, प्रमुख अभियंता(परियोजना) सिंचाई भवन में अधिकारियों व कर्मचारियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा
  • उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग
  • उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग
  • सरकार ई-मार्केट प्लेस
श्रीमती स्वाती सिंह

श्रीमती स्वाती सिंह

माननीया राज्यमंत्री
(स्वतंत्र प्रभार) बाढ़ नियंत्रण

श्री बलदेव सिंह ओलख

श्री बलदेव सिंह ओलख

माननीय राज्यमंत्री
सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)

क्विक लिंक्स

हमारे बारे में

वेदों में जल संसाधनों यथा कुओं, नहरों एवं बॉंधों का उल्‍लेख अनेक स्‍थानों पर मिलता है। कूप (कुऑं), कवट (खोदकर बनाये गये गढढे) का उल्‍लेख ऋगवेद के कई स्‍थलों पर है। कुओं से पानी, पत्‍थर के बने चक्‍के (अश्‍मचक्र) से निकाला जाता था, जिसमें रस्सियों के सहारे जल भरने वाले कोष बँधे रहते थे। कूपों का उपयोग मनुष्‍यों तथा पशुओं के निमित्‍त जल निकालने के लिए ही नहीं किया जाता था, वरन् कभी-कभी इनसे सिंचाई भी की जाती थी। ऋगवेद में शब्‍द अवता का भी उल्‍लेख है जो कि कुएं का प्रतीक है एक अन्‍य रिचा में कुल्‍या शब्‍द भी आया है, जिसका तात्‍पर्य कृत्रिम नहर से है। यजुर्वेद में नहरों के खोदने के प्रसंग आये है। देवताओं के गुरु बृहस्‍पति ने भी कहा है कि बॉंधों एवं नहरों की मरम्‍मत पवित्र कार्य है। उनका उत्‍तरदायित्‍व राज्‍य के धनी लोगों का होना चाहिए। इससे स्‍पष्‍ट होता है कि भारत में प्राचीन काल से ही सिंचाई संसाधनों का उपयोग हो रहा है तथा इनका काफी महत्‍व रहा है।

3150 वर्ष ईसा पूर्व महाभार‍त काल में खेती की सिंचाई करने का उल्‍लेख अनेक ग्रन्‍थों में मिलता है इस संदर्भ में जब ऋषिराज नारद राजा युद्धिष्‍ठर से मिलने उनके राज्‍य में आते है, और उनसे पूछते है कि क्‍या आपके राज्‍य में किसान हृष्‍टपुष्‍ट एवं समृद्धशाली है? क्‍या जलाशय बृहद और पर्याप्‍त है तथा पानी से पूरी तरह हुए है एवं राज्‍य के विभिन्‍न भागों में पानी का वितरण हो रहा है? यह इस तथ्‍य का परिचायक है कि महाभारत काल में भी सिंचाई व्‍यवस्‍था की ओर पर्याप्‍त ध्‍यान दिया जाता था।

(यांत्रिक संगठन)

  • प्रदेश में चलित राजकीय नलकूपों की संख्या - 33,375
  • कुल चलित 33,375 राजकीय नलकूपों में से 25,205 राजकीय नलकूप 1.5 क्यूसेक क्षमता के एवं शेष 8,170 राजकीय नलकूप 1.0 क्यूसेक क्षमता के है। प्रदेश में चलित राजकीय नलकूपों से 29.29 लाख हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित है।
  • कुल चलित - 249 लघु डाल नहरों से 1.77 लाख हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित है।
  • कुल 28 बृहद एवं मध्यम पम्प नहरें कार्यशील है। बृहद एवं मध्यम पम्प नहरों के शीर्ष कार्य यांत्रिक संगठन द्वारा एवं सींच दर्ज किये जाने का कार्य सिविल संगठन द्वारा किया जाता है।

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