श्री योगी आदित्यनाथ

श्री योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश

डॉ महेंद्र सिंह

डॉ महेंद्र सिंह

माननीय कैबिनेट मंत्री
जल शक्ति, उत्तर प्रदेश

  • Sri T. Venkatesh, Principal Secretary & Sri V. K. Niranjan EnC(Project): Commissioning of newly installed pumps at Ayodhya on 15.10.2019 Project of pump house has completed in record time of one seaso
  • Conference on renewable Energy scheduled on  22-23 October 2019
  • Sri Akhil Kumar (IPS), Joint Secretary, National Hydrology Project, Ministry of Jalshakti, Government of India has monitored the progress of National Hydrology Project/proposal of revised PIP for Mid
  • मा मंत्री जी जल शक्ति विभाग द्वारा प्रदेश की विभिन्न सिंचाई नहरों की सिल्टसफाई की दिनांक 24.08.2019 को समीक्षा बैठक कर सभी नहरों के सिल्टसफाई की कार्ययोजना पर विचार विमर्श किया गया, जिससे नहरों के टेल
  • लखनऊ में जलशक्ति मंत्रालय के अंतर्गत सिंचाई विभाग में ऐतिहासिक पहल करते हुए Transprent Posting Policy द्वारा अधीनस्थ चयन सेवा आयोग से चयनित 73 अवर अभियंताओ को ब्लैकबोर्ड लगाकर आयोग की मेरिट के आधार पर
  • डॉ महेंद्र सिंह माननीय मंत्री जल शक्ति विभाग द्वारा कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया परिकल्प भवन में दिनांक ०३.०९.२०१९ को समीक्षा बैठक/ निरीक्षण किया गया।
  • डॉ महेंद्र सिंह माननीय मंत्री जल शक्ति विभाग द्वारा कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया परिकल्प भवन में दिनांक ०३.०९.२०१९ को समीक्षा बैठक/ निरीक्षण किया गया।
  • मा. कैबिनेट मंत्री जलशक्ति विभाग डा.महेन्द्र सिंह द्वारा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ दिनांक 27.08.2019 को समीक्षा बैठक करते हुए।
  • माननीय डॉ महेंद्र सिंह जी कैबिनेट मंत्री जलशक्ति विभाग, उत्तर प्रदेश का दिनांक २७.०८.२०१९ को प्रभार ग्रहण करते हुए।
श्री बलदेव सिंह ओलख

श्री बलदेव सिंह ओलख

माननीय राज्यमंत्री
जल शक्ति, उत्तर प्रदेश

श्री विजय कश्यप

श्री विजय कश्यप

माननीय राज्यमंत्री
राजस्व, बाढ़ नियंत्रण
उत्तर प्रदेश

क्विक लिंक्स

हमारे बारे में

वेदों में जल संसाधनों यथा कुओं, नहरों एवं बॉंधों का उल्‍लेख अनेक स्‍थानों पर मिलता है। कूप (कुऑं), कवट (खोदकर बनाये गये गढढे) का उल्‍लेख ऋगवेद के कई स्‍थलों पर है। कुओं से पानी, पत्‍थर के बने चक्‍के (अश्‍मचक्र) से निकाला जाता था, जिसमें रस्सियों के सहारे जल भरने वाले कोष बँधे रहते थे। कूपों का उपयोग मनुष्‍यों तथा पशुओं के निमित्‍त जल निकालने के लिए ही नहीं किया जाता था, वरन् कभी-कभी इनसे सिंचाई भी की जाती थी। ऋगवेद में शब्‍द अवता का भी उल्‍लेख है जो कि कुएं का प्रतीक है एक अन्‍य रिचा में कुल्‍या शब्‍द भी आया है, जिसका तात्‍पर्य कृत्रिम नहर से है। यजुर्वेद में नहरों के खोदने के प्रसंग आये है। देवताओं के गुरु बृहस्‍पति ने भी कहा है कि बॉंधों एवं नहरों की मरम्‍मत पवित्र कार्य है। उनका उत्‍तरदायित्‍व राज्‍य के धनी लोगों का होना चाहिए। इससे स्‍पष्‍ट होता है कि भारत में प्राचीन काल से ही सिंचाई संसाधनों का उपयोग हो रहा है तथा इनका काफी महत्‍व रहा है।

3150 वर्ष ईसा पूर्व महाभार‍त काल में खेती की सिंचाई करने का उल्‍लेख अनेक ग्रन्‍थों में मिलता है इस संदर्भ में जब ऋषिराज नारद राजा युद्धिष्‍ठर से मिलने उनके राज्‍य में आते है, और उनसे पूछते है कि क्‍या आपके राज्‍य में किसान हृष्‍टपुष्‍ट एवं समृद्धशाली है? क्‍या जलाशय बृहद और पर्याप्‍त है तथा पानी से पूरी तरह हुए है एवं राज्‍य के विभिन्‍न भागों में पानी का वितरण हो रहा है? यह इस तथ्‍य का परिचायक है कि महाभारत काल में भी सिंचाई व्‍यवस्‍था की ओर पर्याप्‍त ध्‍यान दिया जाता था।

(यांत्रिक संगठन)

  • प्रदेश में चलित राजकीय नलकूपों की संख्या - 33,848
  • कुल चलित 33,848 राजकीय नलकूपों में से 24267 राजकीय नलकूप 1.5 क्यूसेक क्षमता के एवं शेष 9,581 राजकीय नलकूप 1.0 क्यूसेक क्षमता के है। प्रदेश में चलित राजकीय नलकूपों से 29.06 लाख हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित है।
  • कुल चलित - 252 लघु डाल नहरों से 1.83 लाख हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित है।
  • कुल 29 बृहद एवं मध्यम पम्प नहरें कार्यशील है। बृहद एवं मध्यम पम्प नहरों के शीर्ष कार्य यांत्रिक संगठन द्वारा एवं सींच दर्ज किये जाने का कार्य सिविल संगठन द्वारा किया जाता है।


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