मुद्दे और समाधान

(क) समस्याएं

  • गोमती नदी में पानी का प्रवाह बहुत तेजी से समाप्त हो रहा है।
  • सीतापुर बाईपास से लेकर शहीद पथ तक गोमती नदी में कुल 37 नाले जल निकास मिलता है। नाला जल निकाय का दाहिनी ओर से (सिस गोमती) सबसे ज्यादा निर्वहन 660 एमएलडी और बाई ओर से (ट्रान्स गोमती) सबसे ज्यादा निर्वहन 513 एमएलडी है। ऊपरी नालों से आने वाले सीवेज पानी में से जल निगम और नगर निगम मात्र 401 एमएलडी सीवेज पानी पर नियंत्रण कर सकते हैं। बाकी का सीवेज पानी सीथे गोमती नदी में गिरता है।
  • शहर में प्रवेश करने से पहले नदी के पानी में मिश्रित ऑक्सीजन की मात्रा 10 मिग्रा/लीटर होती है और बाद में शहर से बाहर निकलते-निकलते इसकी मात्रा 2 मिग्रा/लीटर हो जाती है, जिसके कारण इस पानी में जलीय जीवों का रहना काफी मुश्किल हो जाता है या यूं कहें की नामुमकिन हो जाता है।
  • क्योंकि नदी को चैनलाईज़ नहीं किया गया है, जिसके कारण पानी का फैलाव काफी ज्यदा है और इसी वजह से नदी के जल का वाष्पीकरण काफी अधिक है।
  • नदी के दोनों ओर जमीन का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है और अवैधानिक व्यवसाय भी काफी बढ़ रहा है।

(ख) समाधान

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लखनऊ में गोमती नदी को चैनलाईज किया जाना चाहिए।
  • बारिश के मौसम के पहली तूफानी वर्षा को नियंत्रित करने के लिए (जिसमें काफी प्रदूषित पानी होता है), नदी के दोनों ओर ट्रंक सीवेज जल निकास बनाया जाना चाहिए। बाईं तरफ (ट्रान्स गोमती) ट्रंक निकास की क्षमता 09 क्यूमेक होनी चाहिए और दाहिनी ओर (सिस गोमती) पर ट्रंक निकास की क्षमता 11.5 क्यूमेक होनी चाहिए। इस निर्माण अभी प्रस्तावित है।
  • सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाने के लिए जल निगम/नगर निगम ने एक परियोजना को तैयार किया है और स्वीकृति के लिए सरकार को प्रेषित कर दिया है।
  • नदी में अतिरिक्त पानी का स्तर बढ़ाया जाएगा, जिससे भविष्य में पेयजल परिस्थिति में और लखनऊ शहर के वातावरण में सुधार आएगा।
  • गोमती नदी के दोनों ओर सड़क का निर्माण कराया जाएगा जिससे यातायात में सुविधा मिलेगी।
  • नदी के तटों पर ग्रीन बेल्ट का निर्माम किया जाएगा, जिससे रिवरफ्रंट में भी विकास होगा। इसके तहत साइकिल ट्रैक, पैदल-पथ, वॉटर स्पोर्टस सुविधा, जल ट्रांसपोर्ट और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
  • शारदा केनल प्रणाली से महदोइया और अटरिया एन्कलेव द्वारा गोमती में अतिरिक्त पानी पुहंचाया जाएगा।
  • पीलीभीत, हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर खीरी में 27 झील और तालाब बनाए जाएंगे ताकि नदी के पुनर्जनन के लिए पानी उपलब्ध हो सके।

(ग) परियोजना का प्रावधान

  • शारदा कैनल प्रणाली के अटरिया औऱ महदोइया एस्केप की क्षमता पुनर्जनन करना ताकि गौघाट के तरह यहां भी अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सके।
  • पक्का पुल के अस्थायी तटबंध अपस्ट्रीम का निर्माण।
  • नालियों द्वारा गोमती नदी में गिरने वाले कचड़े को साफ करना।
  • पक्का पुल से लेकर गोमती बांध तक 8.1 किमी पर डायाफ्राम वॉल/पिचिंग को निर्माण करना जिससे नदी को चैनलाइज़ किया जा सकेगा।
  • गोमती नदी में सीधे दूषित पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नदी के दोनों ओर नालियों को भेदने के लिए निर्माण किया जाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नदी के तटों पर ग्रीन बेल्ट का निर्माम किया जाएगा, जिससे रिवरफ्रंट में भी विकास होगा। इसके तहत साइकिल ट्रैक, पैदल-पथ, वॉटर स्पोर्टस सुविधा, जल ट्रांसपोर्ट और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
  • गोमती नदी के प्रस्तावित योजना में, दोनों बांध के साथ-साथ सभी ढांचों की उचित प्रदीप्ति।
  • कृषि योग्य बनाने हेतु भूमी का एकीकृत विकास एवं सौंदर्यीकरण।