राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एनएचपी)

राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एस.डबल्यू), यू.पी की स्थापना जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली पत्र संख्या 21/97 (8) / 2014 /एचपी दिनांक 23.01.2015 के निर्देशन में की गई है। इस परियोजना में हाइड्रोलॉजिकल सूचना प्रणाली विकसित करने के लिए विश्व बैंक से सहायता ली जाएगी। इस परियोजना में 50% अनुदान विश्व बैंक से तथा 50% अनुदान भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।

इस परियोजना के अंतर्गत ए.डबल्यू.एस, ए.डी.सी.पी एवं स्काडा व पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने वाले उपकरण बांध, जलाशयों और बैराजों में चयनित स्थानों पर प्रस्तावित है जो सिंचाई और जल संसाधन विभाग यूपी के नियंत्रण में हैं।

इस परियोजना में एच.आई.एस विकसित किया जाएगा ताकि वैबसाइट के माध्यम रीयल टाइम डेटा का विनिमय किया जा सके से, जिससे सिंचाई प्रणाली और सभी हितधारकों में प्रभावी ढंग से पानी का उपयोग मजबूत किया जा सके। स्काडा के तहत, बांधों और बैराजों के समान अलग स्थान पर पानी के स्वत: नियंत्रण प्रणाली का प्रावधान है जिसके द्वारा पानी का विधिवत् वितरित किया जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप सिंचाई के क्षेत्र में काफी वृद्धि हो सकती है। इसके साथ-साथ रीयल टाइम डेटा के माध्यम से बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन भी काफी आसान हो जाएगा तथा भविष्य में सिमुलेशन की मदद से लंबे समय की और कम समय की बाढ़ का पूर्वानुमान संभव हो पाएगा।

यूपी एक बड़ा राज्य है तथा यहाँ सिंचाई प्रणाली का एक बड़ा बुनियादी ढाँचा मौजूद है साथ ही राज्य में आठ बड़े बारहमासी नदी घातियाँ भी मौजूद हैं जो 2.41 लाख वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। राज्य में सिंचाई सुविधा 73,997 किमी नहर, 21 बैराज तथा 135 बांधों और जलाशयों द्वारा प्रदान की जाती है। इसके अलावा पूरे राज्य मे बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन का कार्य भी विभाग द्वारा किया जाता है।

पूरे राज्य में एन.एच.पी को लागू करने के लिए एन.एच.पी का विस्तृत विवरण तैयार किया गया है जिसमें एच.आई.एस, ए.डबल्यू.एस, ए.डी.सी.पी, डिजिटल रेन गौजेस, एल.आई.डी.ए.आर सर्वेक्षण, बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, जलाशय अवसादन सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और स्काडा का सभी बैराज पर प्रावधान है।

राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना(एस.डबल्यू) यू.पी अपने उद्देश अनुसार राज्य में जल विज्ञान सूचना प्रणाली स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा जो कि बाढ़ पूर्वानुमान, जलाशय संचालन तथा सभी हितधारकों में प्रभावी ढंग से जल संसाधन प्रबंधन में सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा सकेगी।

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