Bansagar

बाणसागर नहर परियोजना

                उत्तर प्रदेश के पठारी क्षेत्र के बेलन घाटी में स्थित मीरजापुर एवं प्रयागराज जनपद कृषि उपज के दृष्टिगत अत्यन्त पिछडे जिले है। यहॉ की भूमि खेती के लिए बहुत उपजाऊ है परन्तु सिंचाई के पानी की अतिआवश्यकता है। इन जनपदों में विश्वसनीय सिंचाई साधनों की कमी है। बारिश आमतौर पर अक्टूबर एवं नवम्बर महीनों में न के बराबर होती है जिससे खरीफ एवं रबी फसल की उपज कम हो जाती है जिसके कारण संकर बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक आदि का प्रयोग अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है। सिंचाई संसाधनों का दोहन एवं सिंचाई से कृषि उत्पादन को बढावा देने के लिए घाटी के भीतर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना ही इस परियोजना का उद्देश्य है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाणसागर बांध मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोन नदी पर निर्मित है। सोन नदी के पानी को उत्तर प्रदेश में मीरजापुर जिले में निर्मित जलाशयों (अदवा, मेजा एवं जिरगो जलाशय) के लिए उपलब्ध कराया जायेगा, जहॉ से यह पानी मीरजापुर और प्रयागराज जिलो के मौजूदा नहरी कमाण्ड क्षेत्र में उपयोग किया जायेगा।

                बाणसागर परियोजना तीन राज्यों अर्थात म0प्र0, उ0प्र0 एवं बिहार के द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित करायी जाने वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना है। बाणसागर परियोजना, योजना आयोग के पत्र सं0 II-2(28)/77-1&CAD Dt. 10.08.1978 द्वारा अनुमोदित की गई। 16 सितम्बर 1973 को म0प्र0, उ0प्र0 एवं बिहार राज्य द्वारा आपसी समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। इस समझौते के अनुसार बाणसागर परियोजना (बांध एवं संयुक्त जल वाहिनी की पुर्नवास लागत सहित) की लागत के लिए लाभार्थी राज्यों द्वारा साझा एवं उपभोग किये जाने वाली पानी की मात्रा के अनुपात (2:1:1) में वहन किया जायेगा। उ0प्र0 के हिस्से में जल वितरण निम्नानुसार है :-

बाणसागर जलाशय से -     1234 एम.सी.एम.     (1.00 एम.ए.एफ.)

कनहर सब बेसिन से -     309 एम.सी.एम.      (0.25 एम.ए.एफ.)

                              योग :        1533 एम.सी.एम.     1.25 एम.ए.एफ.

 

                बाणसागर जलाशय से उ0प्र0 के हिस्से का पानी अर्थात 1234 एम.सी.एम. के सापेक्ष 271 एम.सी.एम. (0.22 एम.ए.एफ.) जल पहले से ही सोन पम्प कैनाल के माध्यम से उपभोग किया जा रहा है, जो कि योजना आयोग द्वारा दिनांक 23.02.1974 द्वारा अनुमोदित किया गया था, शेष 963 एम.सी.एम.(0.78 एम.ए.एफ.) बाणसागर पोषक नहर के माध्यम से म0प्र0 द्वारा उ0प्र0 को दिया जायेगा। म0प्र0 द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाले 963 एम.सी.एम. पानी से मौजूदा सिंचाई के अलावा प्रयागराज एवं मीरजापुर जिलों में अतिरिक्त क्षेत्र 150132 हे0 की सिंचाई के लिए उपयोग किया जायेगा।

                बाणसागर बांध, संयुक्त जल वाहिनी लम्बाई 22.00 कि.मी. क्षमता 185 क्यूमेक, संयुक्त पोषक नहर (सिहावल) लम्बाई 15.24 कि.मी. क्षमता 72.74 क्यूमेक का निर्माण कार्य म0प्र0 सरकार द्वारा निष्पादित किया गया है। उ0प्र0 सरकार के द्वारा 16.09.1973 के समझौते के आधार पर अंशदान का भुगतान म0प्र0 को किया गया है। उ0प्र0 सरकार द्वारा 71.494 किमी लम्बी बाणसागर पोषक नहर क्षमता 46.46 क्यूमेक जिसमें 2.047 कि.मी. लम्बी सुरंग क्षमता 46.46 क्यूमेक, अदवा मेजा लिंक नहर, मेजा जिरगो लिंक नहर, मेजा कोटा पोषक नहर का निर्माण एवं जल के कुशल उपयोग के लिए मीरजापुर व प्रयागराज जिले के मौजूदा नहर प्रणाली के पुनरोद्धार का कार्य सम्मिलित है।

                बाणसागर नहर परियोजना उत्तर प्रदेश का प्राइस लेवल 1988-89 पर मूल परियोजना  रू0 330.19 करोड़ की जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार की तकनीक सलाहकार समिति की 57वीं बैठक में दिनांक 27.01.1994 को अनुमोदित की गयी थी, उ0प्र0 शासन के पत्र सं0-16/27/ 94-PA(N)दिनांक 15.02.1994 द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी थी। इस परियोजना का प्रथम पुनरीक्षण प्राइस लेवल 2001 पर लागत रू0 955.06 करोड़ की स्वीकृति जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार की तकनीकी सलाहकार समिति की 80वीं बैठक दिनांक 07.02.2003 में अनुमोदित की गयी थी, उ0प्र0 शासन के पत्र सं0-673/प्रा.र.मू.प्र./03 दिनांक 17.11.2003 द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी थी। परियोजना का द्वितीय पुनरीक्षण प्राइस लेवल 2006 लागत रू0 2053.60 करोड़ की जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार की तकनीक सलाहकार समिति की 90वीं बैठक में दिनांक 26.09.2007 को अनुमोदित की गयी थी, उ0प्र0 शासन के पत्र सं0-491/प्रा.र.मू.प्र./06 दिनांक 05.02.2007 द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी थी। परियोजना का तृतीय पुनरीक्षण प्राइस लेवल 2008 लागत रू0 3148.91 करोड़ की जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार की तकनीक सलाहकार समिति की 106वीं बैठक में दिनांक 16.09.2010 को अनुमोदित की गयी थी, उ0प्र0 शासन के पत्र सं0-102/प्रा.र.मू.प्र./10 दिनांक 17.05.2010 द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी थी।

                बाणसागर नहर परियोजना के तृतीय पुनरीक्षण में परियोजना के कार्यां को 31 मार्च 2013 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था। पुनरीक्षित प्राक्कलन के अनुसार रू0 2842.82 करोड़ कार्य के लिए तथा 458.03 करोड़ हिस्सेदारी लागत उ0प्र0 द्वारा म0प्र0 को देने हेतु तथा 306.09 करोड़ प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष खर्च के रूप में मिलेगा। भारत के योजना आयोग के पत्रांक सं0-(28)/2010-WR dt. 28.01.2013 द्वारा सशर्त समय विस्तार मार्च 2013 से मार्च 2015 तक इस शर्त के साथ दिया गया कि प्रोजेक्ट की धनराशि में कोई परिवर्तन नहीं होगी किन्तु प्रोजेक्ट मार्च 2015 तक कैमूर वन्य जीव अभ्यरण के अन्तर्गत अदवा मेजा लिंक नहर के (किमी. 18.650 से 25.600) देरी से ट्रांसफर के कारण पूर्ण न हो सका। जनवरी 2015 में सिंचाई विभाग, उत्तर-प्रदेश के संयुक्त सलाहकार (जल संसाधन विभाग) द्वारा अगले एक वर्ष अर्थात मार्च 2016 के विस्तार पर विचार किया गया एवं माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में वन्य जीव अभ्यरण पर अन्तिम निर्णय लम्बित रहने की प्रत्याशा में विस्तार दिया गया। मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 21.08.2015 को अदवा मेजा लिंक नहर तथा मेजा जिरगो लिंक नहर का निर्माण कार्य वन्य जीव अभ्यरण की भूमि में किये जाने की अनुमति प्रदान करते हुए निर्णय पारित किया गया। मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेश के उपरान्त अदवा मेजा लिंक नहर का निर्माण कार्य मार्च 2018 तक पूर्ण की लिया गया है। शासन के पत्रांक-1420/17-27-सिं-9-72 एसएवी/18, दिनांक 20.07.2017 के अनुपालन में रू0 300.00 करोड़ में पूर्ण कराने हेतु परियोजना के कुछ कार्यां जैसे कि सर्विस रोड़ को पक्का करना, नहरों के सीपेज ड्रेन का कार्य, बाणसागर नहर के बैकों के सुदृढ़ीकरण के कार्य एवं यू डिवाई एण्ड माइनरो के कार्यो इत्यादि को हटाकर बाणसागर नहर परियेजना के अवशेष कार्यां को पूर्ण कराने हेतु पुनः प्राइज लेवल 2015 के आधार पर रू0 3420.24 करोड़ की पुनरीक्षित परियोजना प्राक्कलन उ0प्र0 शासन के पत्रांक संख्या 90/2018/1994/18-27-सि.-9-48एसएवी/08 दिनांक 04.07.2018 द्वारा स्वीकृत किया गया है। परियोजना के समस्त कार्य माह 03/2021 तक पूर्ण कर लिये गये है। परियोजना में प्रस्तावित 150132 हे0 अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित कर ली गयी है, जिसके सापेक्ष 65232 हे0 का विगत वर्ष 2020-21 में सृजित सिंचन क्षमता का उपभोग कर लिया गया है तथा आगामी वर्षो में वृद्धि होने की सम्भावना है।

 

 

 

परियोजनान्तर्गत कराये गये मुख्य कार्यो का विवरण

बाणसागर बांधः-

  • बाणसागर बांध का निर्माण मध्य प्रदेश के शहडोल जनपद के देवलोन में मध्य प्रदेश सरकार कराया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बांध की लागत का 25 प्रतिशत धनराशि अंशदान के रूप में मध्य प्रदेश को प्रदान की गयी है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी 000 किमी0 लम्बी संयुक्त जल वाहिनी एवं 15.240 किमी0 संयुक्त पोषक नहर का निर्माण कराया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इन दोनो नहरो की लागत का क्रमशः 1/3 एवं 2/3 भाग अंशदान के रूप में मध्य प्रदेश को दिया गया। उपरोक्त सभी कार्य पूर्ण हो चुके है तथा वर्तमान में चलित अवस्था में है।

बाणसागर पोषक नहर :-

  • इस नहर की कुल लम्बाई 494 कि.मी. एवं डिस्चार्ज 46.46 क्यूमेक है, जिसमें 2.047 कि.मी. सुरंग की लम्बाई भी सम्मिलित है। नहर निर्माण हेतु मिट्टी का कार्य, सुरंग के निर्माण का कार्य एवं समस्त पक्के कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस नहर का संचालन वर्ष 2013 से अधिकतम 700 क्यूसेक क्षमता से किया जा रहा है। मध्य प्रदेश द्वारा मांग के उपरान्त भी 1640 क्यूसेक क्षमता से पानी नहीं उपलब्ध कराया गया।

अदवा मेजा लिंक नहर :-

  • इस नहर की कुल लम्बाई 600 कि.मी. एवं डिस्चार्ज 46.46 क्यूमेक है। इस नहर का निर्माण एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण हो चुका है। इस नहर पर कुल 45 अदद पक्के कार्य प्रस्तावित थे, सभी पक्के कार्य पूर्ण किये जा चुके है। इस नहर का संचालन वर्ष 2018 से अधिकतम क्षमता 1640 क्यूसेक से करके मेजा जलाशय में मांग के अनुसार पानी दिया जा रहा है।

मेजा जिरगो लिंक नहर :-

  • इस नहर की कुल लम्बाई 130 कि.मी. डिस्चार्ज 16.43 क्यूमेक है। इस नहर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इस नहर पर कुल 71.130 कि0मी0 लम्बाई में लाइनिंग का कार्य प्रस्तावित है जिसके विरूद्ध 64.055 कि.मी. लाइनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस नहर पर कुल 190 अदद पक्के कार्य प्रस्तावित कार्य पूर्ण किये जा चुके है। इस नहर को वर्ष 2018 से किमी0 52.000 तक संचालित किया जा रहा था। वर्ष 2021 के जुलाई माह से टेल तक नहर का संचालन कर जिरगो जलाशय में 200 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है।

 

 

 

मेजा कोटा फीडर चैनल :-

  • इस नहर की कुल लम्बाई 577 कि.मी. (डिस्चार्ज 9.21 क्यूमेक) के समस्त कार्य पूर्ण किये जा चुके है। इस नहर का संचालन वर्ष 2018 से पूर्ण क्षमता से किया जा रहा है। इस नहर के द्वारा रानीबारी राजवहा एवं उपरौध राजवहा प्रणाली को वर्ष 2018 से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

राजवाहे एवं अल्पिकाएं :-

  • परियोजना के अन्तर्गत बेलन नहर प्रणाली, टोंस नहर प्रणाली, यमुना नहर प्रणाली, जिरगो नहर प्रणाली एवं बरौधा नहर प्रणाली के मुख्य नहर/शाखा नहर/राजवाहे के पुनरोद्धार का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। परियोजना के अन्तर्गत थोथा माइनर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसके लिए आवश्यक भूमि जिला प्रशासन के सहयोग से प्राप्त की जा रही है केवल 8 हेक्टेयर भूमि अवशेष है।

वी वाटर कोर्सेजः-

  • परियोजना के अन्तर्गत नहरों के कमाण्ड में हर खेत को पानी पहॅुचाने के उद्देश्य से 869 अदद कुलाबों के हेड एण्ड टेल वाल का निर्माण कार्य एवं 639 गुलों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।

 

 

 

Salient Features of system

Barrages/Dam

Content will be available soon.

Canal

S.No. Name of Channel Discharge Length Remark
 Bansagar Feeder Channel  1640  71.494  L/B
 Adawa Meja Link Channel  1640  25.600  R/B
Meja Jirgo Link Channel 580 71.130 R/B
Meja Kota Feeder Channel 325 3.577 L/B

S.No. Channels Totla Nos Total Length Remark
Distributaries NILL      
Minors

S.No. Name of the System C.C.A (Heet.) P.P.A (Heet.) Benefited Remark
Kharif Rabi District Village (Nos.)
              NILL

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